Posts

ये पेंटिंग कौन बनाता है पापा

Image
एक दिन की बात है । शब्द अपने मम्मा-पापा के साथ बाइक से अपने बाबा के पास जा रहे थे । शब्द बाइक पर आगे बैठते हैं और खूब बातें करते हैं ।   ...तो शब्द कर रहे थे बातें...   ...खूब सारी बातें...  पहले तो वह गाना गाते रहे... कान्हा वाला... फिर वन... टू... थ्री... कहना शुरू कर दीं...  घर फिर भी नहीं आया ।   अब शब्द अपने गले में पड़ी दूरबीन से दूर रास्ते को देखने लगे...  एक तरफ से देखते तो रास्ता दूर दिखता था... बहुत दूर...    और दूसरी तरफ से देखते तो बिलकुल पास... एकदम यहीं पर...  और भी न जाने क्या-क्या बातें...  ऐसे ही बाइक गाँव की ओर वाले रास्ते पर मुड गई...  अब चारों रास्ते के दोनों ओर थे खेत...  शब्द शुरू हो गए... ये क्या है... ये क्या है...  पापा बताते जाते...  ये सरसों है...  सरसों क्या होती है...  ...जिसमें से तेल निकलता है... फिर उससे खाना बनता है...  अच्छा ये क्या है...  फिर ये क्या है...  फिर एकदम से...  अच्छा पापा ये स्काई में क्या है...  बादल हैं...  हमें तो प...

खंती मंती

Image
छोटे शब्द को इधर एक खेल बड़ा अच्छा लगाने लगा है । जब भी वह पापा के पास होते हैं अपने आप ही पापा को लिटाकर उनके घुटनों पर चढ़ जाते हैं । पापा समझ जाते हैं और खन्ती-मन्ती करने लगते हैं ।   पापा शब्द को अपने घुटनों पर लिटाए हुए ऊपर-नीचे करते हैं । साथ ही साथ कुछ गुनगुनाते भी जाते हैं ।  खन्ती मन्ती, खेलु खिलाई कउडी पाई, गंग बहाई  गंगा मइया नि बारू दइ बारू हमने भुज्जीक दइ भुज्जीनि हमइं चबेना दो चबेना हम घसियारक दो घसियारनि हमका घास दइ घास हमने गउवइ खबाई गउवा मातानि दूधु दो  दूधकि हमने खीरि पकाई खीरि पूरे घर ने खाई बाबानि खाई दादीनि खाई बुआनि खाई चाचानि खाई अम्मानि खाई पापानि खाई बची बचाई  आरे धरी कंधारे धरी  आई मूस  लइ गइ घूस  बुढ्ढा - बुढिययु हटउ पुरानी दिवार खसी  नइ दिवार उठी  हमारो लल्ला कित्तो ऊंचो  इत्तोsssssss ऊंssssचो....  शब्द को यह गीत बहुत अच्छा लगता है । शब्द पापा से ऐसा करने और गाने के लिए बार-बार जिद करता है । खासकर जब पापा उसको पैरों से खूब ऊंचे पर उठाते हैं...  शब्द खूब खिलखिलाकर हँसता है।  स...

इस घर में आप भी रहोगे न पापा

Image
एक दिन की बात है । तब शब्द स्कूल नहीं जाया करते थे लेकिन पापा रोज स्कूल जाते थे । एक दिन पापा जब स्कूल से वापस आए तो देखा शब्द ने कुछ बनाया है । बेड के चार गद्दों, तकियों से ।   एक मेज को खड़ी करके उसके इधर-उधर से गद्दे लगाए गए थे । एक ओर अपनी साइकिल ‘इबनेबतूता’ को भी खड़ी कर लिया था । उसके अंदर शब्द ने मम्मा के किचन से कुछ बर्तन भी रख लिए थे । साथ ही अपनी कुर्सी और मेज भी ।  शब्द के इस क्रियेशन को देख पापा मुस्कुराए ।  उन्होंने चेयर पर बैठ अपने जूते निकालते हुए पूछा – ये क्या बना है शब्द...  ‘घर बनाया है...’ – शब्द तपाक से बोल पड़े ।  ‘इस घर में आप भी रहोगे न पापा...’ शब्द पापा से मनुहार करते हुए बोले ।  पापा ने खुश होकर कहा – ‘हाँ क्यों नहीं ! मैं तो जरूर रहूँगा इसमें...’  फिर क्या था । पापा, मम्मा को साथ लेकर जा पहुंचे शब्द के इस घर में...   शब्द बहुत खुश हुए । वह बताने लगे –  ‘ये आपका बेडरूम है... यहाँ हम सब लेटेंगे...  इस कमरे में आप अपनी किताबें और कंप्यूटर रख लेना... ये मम्मा का किचन है... इसमें हम खाना बनाएंगे....

ये खिलौने बाजार में नहीं मिलते

Image
शब्द फाइव इयर का हो गया है । वह अपने मम्मी-पापा के साथ शहर में रहता है । वहीं एक स्कूल में पढ़ता भी है । यहाँ उसके कई अच्छे दोस्त बन गए हैं । अक्षत भइया, गोंटू, नमो भइया, वीर तो शब्द के मोहल्ले में ही रहते हैं ।   ...इसके अलावा मायरा, नियति, आराध्या, राज, शुभ, अनुष्का, दानिश और इसनेहा मैम उसके स्कूल के बेस्ट फ्रेंड हैं ।  शब्द इन सबके साथ खूब खेलता है ।  स्कूल के फ्रेन्डों के साथ वह स्कूल में मैम के सामने खेलता है । झूला झूलना, पेंसिल से खेलना, पकड़म-पकड़ाई... कभी-कभी वह इन दोस्तों के साथ अपनी वैन में भी खेलता है...  ...लेकिन शब्द का असली खेल तो मोहल्ले वाले दोस्तों के साथ होता है । इन सबके पास खूब सारे खिलौने हैं । वह सब टीवी के कार्टून वाले खेल खेलते हैं...   शब्द के पास खूब सारी गेंदें हैं... सब उसके साथ गेंदों से खेलते हैं... गोंटू के पास कई सारे टैड़ी हैं... सब उसके साथ टैड़ी से खेलते हैं...  वीर के पास बहुत बढ़िया साइकिल है... सबने अपने पापा से साइकिल मंगाईं... अब सब साइकिल से भी खेलते हैं...  नमो भइया के पास एक बंदूक है । उसमें से कई तरह की ...

सबीहा आंटी वाली कहानी

Image
शब्द रोज वाली जिद फिर करने लगे । पापा के गले में गोफा डाले हुए कहानी सुनाने की मनुहार... काफी देर पोटने-पाटने पर पापा तैयार हुए... ...और शब्द को टालने के प्रयास से लगे वही पुरानी कहानी सुनाने...  ‘...बहुत दिनों की बात है...’ शब्द समझ गए कुछ-कुछ, लेकिन अभी चुप रहे... ‘...एक गाँव में एक राजा और एक रानी रहते थे...’ अब शब्द से न रहा गया । पापा की गोद में चढ़ते हुए उनके लिप्स पर फिंगर रख दी ।  ‘...अब नहीं... बिलकुल नहीं... ये वाली कहानी बिलकुल नहीं सुननी है... ...एक राजा वाली नहीं सुनाना... ...एक रानी वाली भी नहीं सुनाना...’  ‘...फिर कौन-सी सुनाऊँ... ’ पापा थोड़ा झुँझलाते हुए बोले ।  ‘...कोई भी सुना दो... आपको तो बहुत सारी कहानियाँ आती हैं... इतनी सारी किताबें पढ़ते हो... कोई भी सुना दो भाई मेरे...  ...मून वाली... ...टाइगर वाली... ...जंगल वाली...  ...साइकिल वाली...  ...सन वाली...’  पापा सोचने लगते हैं ।  ‘...कौन-सी सुनाऊँ... कौन सी सुनाऊँ...’ शब्द : अच्छा वो वाली सुना दो... पापा : कौन वाली...  शब्द : सबीहा वाली... जो आंटी बम में फ्लावर लगाती थीं...

शब्द का गाना

Image
घर में सब लोगों की महफ़िल जमी थी । सब अंत्याक्षरी खेल रहे थे । सभी बहुत ही बेसुरा गा रहे थे । सबको देखकर शब्द को भी जोश आ गया ।  ‘...मैं भी दाना दाउंदा...’ ‘...तो दाओ न...’ मम्मा बोलीं ।  ...और शब्द गाने लगे... टी वी वाला गाना...  ‘...कान्हा छू जा जरा...  ...कान्हा छू जा जरा... ...बंसी बजइया... ...नंदलाला कन्हइया...  ...पर्वत उठइया... ...मक्खन खबइया... ...होमवर्क करइया...  ...राक्षस भगइया...  ...फ्रेंड के साथ खिलइया...  ...सबकी हेल्प करइया...’     जग गाना रबड़ की तरह खिचने लगा तो सबको आ गई हंसी...  ...सब हँस पड़े तो शब्द गए रूठ...   ...अब रूठ गए तो सब उन्हें लगे मनाने...  और जब मनाने में लग गए तो अंत्याक्षरी हो गई खतम ।    सुनील मानव

सेंटा के खिलौने

Image
एक दिन की बात है । शब्द सोकर उठे तो उनके पास एक गिफ्ट रखा था । शब्द को पता था – ‘इस रात सेन्टा आने वाला है ।’ इसनेहा मैम ने उसे पहले ही कहानी सुनाई थी । गिफ्ट देखकर शब्द बहुत खुश हो गए । जल्दी से पैकेट खोला... अरे यह क्या !   ... शब्द की सभी फ़ेबरेट चीजें...  एक बड़ी सी वॉल... कई सारी चॉकलेट... जेम्स की बोतल... और भी बहुत सारी चीजें...  शब्द सर पकड़कर बैठ गया...  बोला – लगता है पागल ही हो जाऊंगा...  खुशी सम्हाले नहीं सम्हाल रही थी...  पापा से बोला – सेन्टा के पास इतने खिलौने आते कहाँ से हैं...  पापा - उसके पास एक मैजिक बैग होता है... उसी में होते हैं...  शब्द - मेरे पास क्यों नहीं है मैजिक बैग...  पापा - आप जब बड़े हो जाओगे तब आपके पास भी आ जाएगा...  शब्द - आप तो बड़े हो... आपके पास क्यों नहीं हैं... अब पापा क्या करें । लगे एक झूठ-मूठ की कहानी सुनाने...  ‘... सेन्टा के पास एक रथ होता है... उसमें हार्स होते हैं... उनके पंख होते हैं... वह आसमान में उड़ता है...’  ‘...हार्स के पंख कैसे होते हैं... वह तो सड़क पर चलता है......