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नीलगाय पर तीन कविताएँ

नीलगाय बचपन में पहली बार सुना था उसके बारे में सुना था कि जंगली होती हैं वह गाय भी और जंगली भी एक साथ दोनों यह एक स्वप्न था सच्चाई उन्हें जंगली अधिक घोषित करती है यह मांसाहा...

मकसूद मियां : सुनील मानव

ईशा की नमाज़ पढ़कर मकसूद मियां बाहर आए तो बाजपेई जी बरोठे में ही बैठे मिले। बोले – ‘चतुर्वेदी जी नमाज़ पढ़नी तो छोड़नी पड़ेगी . . . ’ मकसूद मियां के पोपले गालों पर चमक आ गई – ‘मियां बा...

क्रांतिबीज सुधीर विद्यार्थी से कुछ बातचीत

सुनील ‘मानव’ : क्रांतिकारी लेखन से आपका जुड़ाव कब, क्यों और किस रूप में हुआ? भारतीय साहित्य-विमर्श में जहाँ पाब्लो नेरूदा, नेल्शन मंडेला, एन्गेल्स इत्यादि को नायक के रूप मे...