पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य ‘त्रिपुरा’

सुनील ‘मानव’ पू र्वोत्तर प्रदेश का जिक्र आते ही हमारे मनोमस्तिष्क में वहाँ की ऊँची-नीची पहाड़ी भूमि जो सघन जंगलों से आक्षादित है तैरने लगती है। साथ ही मन में उठने लगती हैं ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों की मन को मोह लेने वाली उत्ताल तरंगें। इस प्रदेश में जहाँ एक ओर सिक्किम की बर्फ से ढकी और सैलानियों के साथ हँसती-खिलखिलाती सूर्य की लालिमा से चमकती हुई पहाड़ियां हैं तो दूसरी ओर असम का कामाख्या मंदिर और रिमझिम बारिश से मन को मोहने वाले प्रदेश। ऐसा ही मन को मोहने वाला एक छोटा राज्य है त्रिपुरा, जहाँ का इतिहास और भौगोलिक वातावरण उसे कई मायनों में महत्त्वपूर्ण बनाता है। प्रथमत: बात की जाए इस राज्य के नाम ‘त्रिपुरा’ की, जिसकी जड़े तलाशते हुए विद्वान तमाम अटकलें लगाते रहे हैं। तमाम जनश्रुतियां प्रचलित हैं इस नाम को लेकर। कोई इस नाम को बर्बर राजा ‘त्रिपुर’ से जोड़ता है तो कोई इसे ‘शिव/त्रिपुरारी’ से संबद्ध करके देखता है। आगे तो विद्वानों ने शिव-पत्नी ‘त्रिपुर-सुंदरी’ अथवा ‘त्रिपुरेश्वरी’ से इस नाम का संबंध दिखाया। कुछ विद्वानों ने इसको तिब्बती-बर्मी और ची...